लंदन का पंचांग London Panchang
शनिवार, 21 अगस्त 2027भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी
लंदन · शहर बदलें
भारत
- अमृतसर
- अयोध्या
- अलीगढ़
- अहमदाबाद
- आगरा
- इंदौर
- उज्जैन
- उदयपुर
- ऋषिकेश
- कानपुर
- कोच्चि
- कोटा
- कोयंबटूर
- कोलकाता
- गया
- गाज़ियाबाद
- गुरुग्राम
- गुवाहाटी
- गोरखपुर
- ग्वालियर
- चंडीगढ़
- चेन्नई
- जबलपुर
- जम्मू
- जयपुर
- जोधपुर
- ठाणे
- तिरुपति
- तिरुवनंतपुरम
- दिल्ली
- देहरादून
- द्वारका
- नई दिल्ली
- नागपुर
- नाशिक
- नोएडा
- पटना
- पुणे
- पुरी
- प्रयागराज
- फ़रीदाबाद
- बरेली
- बेंगलुरु
- भुवनेश्वर
- भोपाल
- मंगलुरु
- मथुरा
- मदुरै
- मुंबई
- मुरादाबाद
- मेरठ
- मैसूरु
- रांची
- राजकोट
- रायपुर
- लखनऊ
- लुधियाना
- वडोदरा
- वाराणसी
- विशाखापत्तनम
- वृंदावन
- शिमला
- शिरडी
- श्रीनगर
- सूरत
- हरिद्वार
- हैदराबाद
विदेश
दिन
- तिथि
- चतुर्थी दोपहर 3:34 तकपंचमी शाम 4:15, 22 अग तक
- नक्षत्र
- रेवती सुबह 6:40, 22 अग तक
- योग
- शूल रात 10:23 तकगण्ड रात 9:49, 22 अग तक
- करण
- बालव दोपहर 3:34 तककौलव रात 3:58, 22 अग तकतैतिल शाम 4:15, 22 अग तक
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- वार
- शनिवार
- मास
- भाद्रपद (पूर्णिमांत) · श्रावण (अमांत)
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सुबह 5:55
- सूर्यास्त
- रात 8:11
- चंद्रोदय
- रात 9:08
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:37 – सुबह 5:16
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:35 – दोपहर 1:32
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 3:26 – शाम 4:23
- निशिता मुहूर्त
- रात 12:44, 22 अग – रात 1:23, 22 अग
इनसे बचें
- राहु काल
- सुबह 9:29 – सुबह 11:16
- यमगण्ड
- दोपहर 2:50 – शाम 4:37
- गुलिक काल
- सुबह 5:55 – सुबह 7:42
- दुर्मुहूर्त
- सुबह 5:55 – सुबह 7:49
चौघड़िया
| काल | सुबह 5:55 – सुबह 7:42 |
|---|---|
| शुभ | सुबह 7:42 – सुबह 9:29 |
| रोग | सुबह 9:29 – सुबह 11:16 |
| उद्वेग | सुबह 11:16 – दोपहर 1:03 |
| चर | दोपहर 1:03 – दोपहर 2:50 |
| लाभ | दोपहर 2:50 – शाम 4:37 |
| अमृत | शाम 4:37 – शाम 6:24 |
| काल | शाम 6:24 – रात 8:11 |
| लाभ | रात 8:11 – रात 9:24 |
|---|---|
| उद्वेग | रात 9:24 – रात 10:38 |
| शुभ | रात 10:38 – रात 11:51 |
| अमृत | रात 11:51 – रात 1:04 |
| चर | रात 1:04 – रात 2:17 |
| रोग | रात 2:17 – रात 3:30 |
| काल | रात 3:30 – सुबह 4:43 |
| लाभ | सुबह 4:43 – सुबह 5:57 |
आने वाले त्योहार
समय लंदन (UTC+1) के हैं, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, लाहिड़ी अयनांश और ऊपरी किनारे वाले सूर्योदय से, जैसा ज़्यादातर भारतीय पंचांग मानते हैं।